उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

अजीत मिश्रा (खोजी)।। बस्ती का ‘डांसिंग’ अस्पताल: यहाँ मरीज़ों के मर्ज का इलाज ‘ठुमकों’ से होता है!

।। संगोष्ठी या 'गुलाब जामुन' पार्टी? सीएमएस साहब का नया चिकित्सा फॉर्मूला—नाचो और गाओ!

।। बस्ती के महिला अस्पताल में ‘ऑपरेशन डांस’, मरीज़ों की आहें और डीजे की धमक।।

शनिवार 03 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। अगर आप समझते हैं कि अस्पताल केवल गंभीर बीमारियों के इलाज और दवाइयों की गंध के लिए होते हैं, तो आपको बस्ती के जिला महिला चिकित्सालय के ‘पार्टी कल्चर’ से रूबरू होने की ज़रूरत है। यहाँ नववर्ष 2026 का स्वागत स्टेथोस्कोप से नहीं, बल्कि ‘जुम्मे की रात है’ जैसे धमाकेदार फिल्मी गानों से किया गया।

⭐ मर्यादा का ‘पोस्टमॉर्टम’:—

अस्पताल परिसर में जहाँ नवजात शिशुओं की पहली किलकारी गूंजनी चाहिए थी, वहाँ डीजे की बेस गूंज रही थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने प्रशासनिक मर्यादा का ऐसा ‘पोस्टमॉर्टम’ किया कि देखने वाले दंग रह गए। शायद स्वास्थ्य विभाग का यह नया ‘प्रोटोकॉल’ है कि मरीज़ों का दर्द कम करने के लिए खुद डॉक्टर साहब को ही फिल्मी गानों पर थिरकना पड़ेगा।

⭐ आमंत्रण पत्र या ‘शादी का कार्ड’?

कार्यक्रम के लिए बाकायदा एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया था। पत्र की भाषा ऐसी थी मानो किसी संगोष्ठी (सेमिनार) में चिकित्सा जगत की नई चुनौतियों पर चर्चा होगी। लेकिन संगोष्ठी के नाम पर जो परोसा गया, उसका मेन्यू किसी वीआईपी शादी से कम नहीं था:—

एजेंडा: डीजे पर ठुमके।

खास आकर्षण: स्टार्टर और ‘गरम-गरम गुलाब जामुन’।

स्थान: सीएमएस आवास (अस्पताल परिसर के ठीक बीचों-बीच)।

💫 तैयारी पूरी, बस संवेदनशीलता गायब:—

हैरानी की बात यह है कि यह सब उस परिसर में हुआ जहाँ महिला मरीज़ और उनके तीमारदार ज़िंदगी और मौत के बीच जूझते हैं। जब वार्ड में महिलाएं दर्द से कराह रही होंगी, तब बाहर ‘जुम्मे की रात’ पर डांस स्टेप्स मिलाए जा रहे थे। शायद प्रशासन का मानना है कि ‘गुलाब जामुन’ की मिठास से अस्पताल की बदहाली और अव्यवस्था का कड़वा सच छिप जाएगा।

🤩 जांच का पुराना ‘नुस्खा’:—

मामला गर्म होते ही मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) ने वही पुराना और विश्वसनीय ‘जांच’ वाला नुस्खा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि “तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।” अब देखना यह है कि यह जांच कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है या फिर इसे भी ‘ठंडे बस्ते’ में डालकर अगले साल के जश्न की तैयारी शुरू कर दी जाएगी।

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